विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में भारतीय हित वाले 12 वाणिज्यिक पोत फिलहाल मौजूद हैं। इनमें छह भारत के ध्वज वाले पोत और छह विदेशी ध्वज वाले पोत शामिल हैं, जो भारत के लिए सामान ला रहे हैं। इन 12 पोतों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि क्षेत्र में संचालित अन्य वाणिज्यिक पोतों पर भी 4,500 से अधिक भारतीय नाविक मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौवहन मंत्रालय इन पोतों की आवाजाही और भारतीय नाविकों की सुरक्षा एवं कुशलक्षेम पर नजर रख रहा है।
सुरक्षा पर भारत की नजर
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय मिशन और अन्य संबंधित पक्ष जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। भारत ने विदेशों में मौजूद अपने समुद्री समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग माना जाता है। हाल के महीनों में क्षेत्र में कई वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
जुलाई में भारत ने एमटी अल बहिया और एमटी मोंबासा पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की थी। इन घटनाओं में एक भारतीय नागरिक की मौत और 10 अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी।
सुरक्षित नौवहन की मांग
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कहा था कि विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में नागरिक जहाजों पर हमले बढ़ती चिंता का विषय हैं। उन्होंने काला सागर, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र की घटनाओं का उल्लेख किया।
भारत ने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान करते हुए वाणिज्यिक पोतों और नाविकों पर हमले रोकने तथा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन बहाल करने की मांग की है।
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