केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की वरिष्ठ नेता और नगर निगम पार्षद आर. श्रीलेखा ने दावा किया है कि उन्हें मेयर बनाए जाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आखिरी समय में हालात बदल गए और वह इस पद से वंचित रह गईं। सोमवार को The Indian Witness से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले उन्हें स्पष्ट आश्वासन मिला था कि वह तिरुवनंतपुरम की पहली बीजेपी मेयर होंगी।
बीजेपी की राज्य उपाध्यक्ष रह चुकीं आर. श्रीलेखा ने कहा, “मुझे पार्टी की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि मुझे मेयर बनाया जाएगा, लेकिन अंतिम क्षणों में कुछ बदल गया।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर अचानक हुए फैसलों के चलते यह स्थिति बनी।
पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रह चुकीं श्रीलेखा को दिसंबर में केरल भर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों से पहले तिरुवनंतपुरम में बीजेपी का प्रमुख चेहरा बनाया गया था। पार्टी ने उन्हें राजधानी में अपनी रणनीति का केंद्र माना और प्रचार के दौरान उनका चेहरा आगे रखा गया। यही वजह है कि मेयर पद को लेकर उम्मीदें और भी मजबूत थीं।
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श्रीलेखा ने कहा कि चुनाव अभियान के दौरान उन्हें पार्टी नेतृत्व का पूरा समर्थन मिला और यह संदेश दिया गया कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो मेयर पद की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाएगी। हालांकि, चुनाव परिणामों के बाद समीकरण बदल गए और पार्टी का फैसला अलग दिशा में चला गया।
उनके इस बयान से केरल बीजेपी की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व के फैसलों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्रीलेखा का बयान पार्टी के भीतर असंतोष की ओर इशारा करता है, खासकर ऐसे समय में जब बीजेपी केरल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में मेयर पद को लेकर यह विवाद अब राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर पार्टी की प्रतिक्रिया भी अहम मानी जा रही है।
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