राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार (6 जनवरी 2026) को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की और भारतीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) को शीघ्र आयोजित करने की मांग की। बैठक के दौरान बीएमएस नेतृत्व ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) की अधिकतम सीमा बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बीएमएस ने न्यूनतम पीएफ पेंशन को वर्तमान ₹1,000 से बढ़ाकर सम्मानजनक स्तर तक ले जाने की मांग की। इसके साथ ही बोनस की गणना की सीमा बढ़ाने, ग्रेच्युटी की पात्रता को मौजूदा 15 दिन के वेतन से बढ़ाकर 30 दिन करने और सभी योजना कर्मियों के मानदेय एवं प्रोत्साहन में वृद्धि की भी मांग रखी गई। यूनियन नेताओं ने संविदा श्रमिकों से जुड़े मुद्दों, भविष्य निधि पेंशन, रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) के प्रस्तावित आईपीओ तथा श्रमिक कल्याण से संबंधित अन्य विषयों को भी श्रम मंत्री के समक्ष उठाया।
बीएमएस के महासचिव रविंद्र हिमते ने बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है, विशेषकर ईएसआई और ईपीएफ की सीमा बढ़ाने तथा न्यूनतम पेंशन में वृद्धि से संबंधित मांगों पर। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन विषयों पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
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बीएमएस इससे पहले अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे चुका था। हालांकि, श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लागू होने के बाद संगठन ने अपने विरोध प्रदर्शनों को फिलहाल स्थगित कर दिया था। बताया जा रहा है कि लंबित मांगों के मद्देनजर ही यह बैठक आयोजित की गई।
इधर, अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी समान मांगों को लेकर 12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल का ऐलान किया है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि महंगाई और बदलते आर्थिक हालात में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
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