कुंभ मेले के क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में आ गई है। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम द्वारा यह मांग उठाए जाने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त निर्णय लिया जाएगा।
रविवार को हरिद्वार के हर की पौड़ी और आसपास के गंगा घाटों का प्रबंधन करने वाली श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा था कि क्षेत्र के उपनियमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पहले से ही रोक का प्रावधान है। उन्होंने दावा किया कि ये नियम लगभग 100 साल पहले बनाए गए थे और उनका उद्देश्य दीर्घकालिक दृष्टि से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा करना था।
नितिन गौतम ने कहा, “हमें आने वाले 100 वर्षों की योजना बनानी चाहिए। जिन लोगों का हमारे धर्म, संस्कृति और भावनाओं से गहरा जुड़ाव नहीं है, उनके प्रवेश से नुकसान हो सकता है। कुंभ सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व है, जो उज्जैन, प्रयागराज, नासिक और हरिद्वार में आयोजित होता है। ऐसे में हम चाहते हैं कि केवल हिंदुओं को ही कुंभ क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी जाए।”
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगी और कानून, परंपरा व व्यावहारिकता को ध्यान में रखते हुए आगे का कदम तय किया जाएगा। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक सूत्र ने बताया कि इस तरह के प्रतिबंध को लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि कुंभ के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक हरिद्वार आते हैं।
सूत्र के अनुसार, कुंभ मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, जहां विभिन्न देशों और समुदायों के लोग पर्यटन, सेवा, मीडिया और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े होते हैं। ऐसे में किसी एक समुदाय के आधार पर प्रवेश प्रतिबंध लागू करना प्रशासनिक और कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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