गृह मंत्रालय ने बुधवार को राज्यसभा में जानकारी दी कि वर्ष 2025 के दौरान देश में वित्तीय साइबर ठगी के मामलों में भारी वृद्धि दर्ज की गई। मंत्रालय के अनुसार, इस अवधि में 1,03,488 वरिष्ठ नागरिकों और 4,63,114 महिलाओं ने साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज कराईं। इन मामलों में कुल 7,769.63 करोड़ रुपये की वित्तीय ठगी की सूचना मिली है।
गृह मंत्रालय ने सदन में बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल भुगतान, ओटीपी और केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। सबसे अधिक प्रभावित वर्गों में वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें ठग विभिन्न तरीकों से झांसे में लेकर उनके बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कई स्तरों पर कार्रवाई कर रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच को मजबूत किया जा रहा है।
और पढ़ें: मध्य प्रदेश में बस किराया बढ़ा, सामान्य, एसी और लग्जरी बसों के नए किराए लागू
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन, संदेश, ईमेल या सोशल मीडिया लिंक पर भरोसा न करें। बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करें। किसी भी संदिग्ध लेनदेन या साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई, डिजिटल जागरूकता अभियान और तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है ताकि लोगों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखा जा सके। सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।
और पढ़ें: व्यक्तिगत कारणों से द हंड्रेड से बाहर हुए एडेन मार्करम, मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की कमान जोस बटलर को