दिल्ली हाई कोर्ट ने एक निजी अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह गंभीर रूप से बीमार बच्चे का इलाज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत करे। अदालत ने कहा कि जरूरतमंद मरीजों को उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर इलाज से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह मामला उस समय उठा जब अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत के सामने दलील दी कि दिल्ली के अधिकतर निजी अस्पताल, बाध्यकारी प्रावधान होने के बावजूद, ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मरीजों को सही तरह की चिकित्सीय सुविधा नहीं देते। उन्होंने कहा कि इस श्रेणी के मानकों को बढ़ाने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों को इलाज मिल सके।
हाई कोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि स्वास्थ्य सेवाएं मुनाफे के बजाय सामाजिक दायित्व से जुड़ी होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ईडब्ल्यूएस कोटे के प्रावधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक पालन होना जरूरी है।
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अदालत के निर्देश के बाद, संबंधित निजी अस्पताल ने आश्वासन दिया कि वह बच्चे का पूरा इलाज ईडब्ल्यूएस श्रेणी में करेगा और इस दौरान आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अदालत ने इस मामले की निगरानी जारी रखने की बात भी कही, ताकि सुनिश्चित हो सके कि आदेश का सही पालन हो रहा है।
यह फैसला दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जरूरतमंद मरीजों के अधिकार मजबूत होंगे और निजी अस्पतालों पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के प्रावधानों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा।
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