2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पांच आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद, एक अन्य आरोपी ने भी समानता (पैरिटी) के आधार पर जमानत की मांग करते हुए दिल्ली की एक अदालत में नई जमानत याचिका दायर की है। यह याचिका सलीम मलिक उर्फ मुन्ना ने दाखिल की है, जो कथित तौर पर एंटी-सीएए/एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के 11 आयोजकों और वक्ताओं में शामिल बताए जाते हैं।
सलीम मलिक की ओर से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बजाज की अदालत में दाखिल आवेदन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को समान आरोपों का सामना कर रहे सह-आरोपी को जमानत दी है और उनका मामला भी उसी श्रेणी में आता है। याचिका में दलील दी गई है कि अभियोजन पक्ष का मामला केवल उन्हें चांदबाग विरोध स्थल पर बैठकों से जुड़े एक “स्थानीय कार्यकर्ता” के रूप में दर्शाता है, जो सह-आरोपी सलीम खान की भूमिका के समान है, जिन्हें शीर्ष अदालत से जमानत मिल चुकी है।
अभियोजन के अनुसार, कथित आयोजकों में मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, शहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद यूनुस, अथर खान, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और उनके भाई खालिद शामिल हैं। अदालत ने सलीम मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 8 जनवरी की तारीख तय की है।
और पढ़ें: दिल्ली दंगा मामला: जमानत पाने के लिए देरी को ट्रम्प कार्ड नहीं बनाया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
सलीम मलिक पर 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एक कार शोरूम में आगजनी में शामिल होने का आरोप है। याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्हें कथित बड़ी साजिश पर स्वतंत्र या रणनीतिक नियंत्रण प्राप्त था।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को ‘फैसिलिटेटर’ मानते हुए जमानत दी थी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सभी आरोपी एक समान स्थिति में नहीं हैं।
और पढ़ें: दिल्ली दंगों के मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं