सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामले में आरोपी उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। सोमवार को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने 10 दिसंबर को इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
उमर ख़ालिद और शरजील इमाम ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था। दोनों पर आरोप है कि वे 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों की कथित बड़ी साजिश का हिस्सा थे।
सुनवाई के दौरान उमर ख़ालिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी थी कि दंगों के समय उमर ख़ालिद दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रखे जाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ हिंसा भड़काने से जुड़े ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। बचाव पक्ष ने मुकदमे में हो रही देरी और ट्रायल शुरू होने में लगने वाले लंबे समय को भी जमानत का आधार बताया था।
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वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा है। पुलिस और जांच एजेंसियों का कहना है कि दंगे किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं थे, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में एक अहम कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
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