भारत में पेंशन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अहम फैसला लिया गया है। देश के पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने बैंकों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत पेंशन फंड प्रायोजित करने की अनुमति दे दी है।
PFRDA ने बुधवार (31 दिसंबर, 2025) को जारी बयान में कहा कि उसने बैंकों को स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी (इन-प्रिंसिपल अप्रूवल) दी है, ताकि वे एनपीएस के अंतर्गत निवेशित धन का प्रबंधन कर सकें। यह मंजूरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्रता मानकों के अधीन होगी।
नियामक के अनुसार, बैंकों को शुद्ध संपत्ति (नेटवर्थ), बाजार पूंजीकरण और वित्तीय मजबूती से जुड़े मानदंडों को पूरा करना होगा। वर्तमान में बैंक एनपीएस में ‘पॉइंट ऑफ प्रेजेंस’ के रूप में कार्य करते हैं, जहां वे ग्राहकों का पंजीकरण, अंशदान संग्रह और अन्य प्रणालीगत सेवाएं प्रदान करते हैं। कुछ मौजूदा पेंशन फंड पहले से ही बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़े हुए हैं।
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फिलहाल PFRDA के साथ 10 पंजीकृत पेंशन फंड कार्यरत हैं। यह कदम पेंशन सुधारों की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। दिसंबर 2024 में PFRDA ने एनपीएस ग्राहकों को गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF), निफ्टी 50 इंडेक्स और वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) में निवेश की अनुमति दी थी।
इसके अलावा, नियामक ने 1 अप्रैल 2026 से पेंशन फंड के लिए निवेश प्रबंधन शुल्क (इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस) संरचना में भी संशोधन किया है। साथ ही एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड में तीन नए ट्रस्टी नियुक्त किए गए हैं, जिनमें देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा भी शामिल हैं।
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