केंद्र सरकार द्वारा जारी अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह दर पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 6.5 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है। ये आंकड़े बुधवार को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए।
यह अनुमान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे वित्तीय वर्ष में तेज आर्थिक वृद्धि को दर्शाता है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया, जिसमें रूसी तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंड भी शामिल था। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, हालांकि अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है।
मंत्रालय के अनुसार, इस उच्च विकास दर में सेवा क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम रही है। मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (GVA) के 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने के पीछे सेवा क्षेत्र की मजबूत वृद्धि प्रमुख कारण है। बैंकिंग, बीमा, आईटी, संचार और अन्य सेवाओं में बेहतर प्रदर्शन ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
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विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जबकि कृषि और बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं में अपेक्षाकृत मध्यम वृद्धि रहने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी 2025-26 में बढ़कर 201.9 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो 2024-25 में 187.97 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, चालू कीमतों पर नाममात्र जीडीपी 8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 357.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो पिछले वर्ष 330.68 लाख करोड़ रुपये थी।
अर्थशास्त्री वेद जैन के अनुसार, ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। साथ ही, ये अनुमान वित्त मंत्री को 2026 के बजट को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
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