आईआरसीटीसी कथित घोटाला मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। यह याचिका ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी।
सोमवार (5 जनवरी, 2026) को न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए CBI को नोटिस जारी किया और साथ ही लालू यादव की ओर से दायर स्थगन याचिका पर भी जवाब मांगा। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी का जवाब देखे बिना मुकदमे की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई जा सकती। मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय की गई है।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पुत्र तेजस्वी प्रसाद यादव तथा 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया था।
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ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस मामले में जमीन और शेयर लेन-देन “रेलवे के रांची और पुरी होटलों में निजी भागीदारी के नाम पर पनपे संभावित क्रोनी कैपिटलिज्म का उदाहरण” प्रतीत होते हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के तहत अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है, जबकि धोखाधड़ी के मामले में अधिकतम सात साल तक की सजा हो सकती है। लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को गलत बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है।
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