कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को चुनाव आयोग को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चुनाव आयोग को भारतीय लोकतंत्र की "आत्मा" मानते थे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार उसे "राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने का साधन" मानती है।
जयराम रमेश ने कहा कि मनमोहन सिंह का स्वभाव और उनकी राजनीतिक विचारधारा कभी भी राष्ट्रीय संस्थाओं का राजनीतिकरण करने की नहीं रही। उनके अनुसार, मनमोहन सिंह ने हमेशा संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा का सम्मान किया।
कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी की आगामी पुस्तक में वर्णित एक प्रसंग के संदर्भ में आई है। पुस्तक में उल्लेख है कि मनमोहन सिंह ने चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता को लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया था।
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जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कई संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह आवश्यक है कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र होकर कार्य करें।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है, जब चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रहे और संवैधानिक संस्थाओं पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव न हो।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और केंद्र सरकार पहले भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगाए गए ऐसे आरोपों को खारिज करती रही है। सरकार का कहना है कि सभी संवैधानिक संस्थाएं अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं।
जयराम रमेश के इस बयान के बाद चुनाव आयोग की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
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