संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्षी दलों से सदन की कार्यवाही में बाधा न डालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन देशहित में सभी को मिलकर काम करना चाहिए और विधेयकों को सकारात्मक समर्थन देना चाहिए।
नई दिल्ली में रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए रिजिजू ने कहा कि संसद को ठप करने वाली गतिविधियां लोकतंत्र और सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और सभी दलों के विचारों को ध्यान से सुना गया।
रिजिजू ने कहा, "देश की जनता चाहती है कि संसद चले। संसद का काम न करना लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। विपक्षी दल सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र में कई मुद्दे उठा सकते हैं, लेकिन उन्हें रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।"
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सर्वदलीय बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का विरोध करते हुए कुछ समय के लिए वॉकआउट किया था। हालांकि बाद में वे बैठक में वापस लौट आए।
टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) का समर्थन किया है। रिजिजू ने कहा कि एनसीपीआई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मान्यता मांगी है और सरकार किसी भी दल को नजरअंदाज नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सभी दलों को आमंत्रित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
वहीं, मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक लाए जाने की अटकलों पर रिजिजू ने कहा कि फिलहाल आठ विधेयक सूचीबद्ध हैं। यदि कोई अतिरिक्त विधायी कार्य जोड़ा जाता है तो उसे पहले व्यापार सलाहकार समिति (बीएसी) में चर्चा के बाद आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी नए विधेयक को पेश करने से पहले विपक्षी दलों को जानकारी देगी। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा।
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