डिफेंस समिट 2026 में भारत की रक्षा तैयारियों, भविष्य के युद्ध की तकनीक और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने चर्चा की। छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पनडुब्बियां, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और पाकिस्तान से जुड़े खतरे चर्चा के प्रमुख विषय रहे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत पांचवीं पीढ़ी के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि अगले दो दशकों की युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर रक्षा क्षमताएं तैयार की जा रही हैं।
थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कहा कि तकनीक लड़ाइयों की अवधि कम कर सकती है, लेकिन युद्ध की अवधि जरूरी नहीं कि कम हो। उनके अनुसार, आधुनिक युद्ध में भी जमीन पर नियंत्रण जीत का महत्वपूर्ण आधार बना रहेगा।
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प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता युद्ध के हर क्षेत्र को बदल सकती है। योजना, लॉजिस्टिक्स, खुफिया जानकारी और निर्णय लेने में एआई की भूमिका बढ़ेगी। उन्होंने चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को फिलहाल स्थिर बताया और कहा कि भारत सतर्क है।
पाकिस्तान को लेकर जनरल सुब्रमणि ने कहा कि भारतीय सेनाएं अपनी सतर्कता कम नहीं कर रही हैं और किसी भी खतरे का तेजी से जवाब देने के लिए तैयार हैं। राजनाथ सिंह ने भी कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब में समुद्री यातायात बाधित होने से मिले सबक का उल्लेख किया। उन्होंने पनडुब्बियों को महत्वपूर्ण सैन्य क्षमता बताते हुए कहा कि नई पनडुब्बियां शामिल होने तक मौजूदा संसाधनों से काम करना होगा।
वायुसेना के उपप्रमुख एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने मौजूदा जरूरतों के साथ भविष्य की युद्ध संरचना विकसित करने पर जोर दिया। रक्षा सचिव आरके सिंह ने बताया कि एएमसीए का पहला प्रोटोटाइप सितंबर 2028 में उड़ान भरने का लक्ष्य है। रूस के सुखोई-57 की खरीद पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
समिट में फ्रांस के साथ हिंद-प्रशांत सहयोग, उपग्रह निगरानी, साइबर क्षमता, स्वायत्त प्रणालियों और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर भी चर्चा हुई।
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