राज्यसभा ने सोमवार को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक को केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने उच्च सदन में पारित कराने के लिए पेश किया।
विधेयक को लेकर सदन में चर्चा के दौरान विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर जोरदार विरोध जताया। विपक्षी सदस्यों ने सवाल उठाए और इस मुद्दे पर सदन में हंगामा किया। हालांकि, हंगामे के बीच सरकार ने विधेयक की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और इसे पारित करा लिया।
एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को पहली बार 29 जुलाई 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र को मजबूत करना और कारोबार करने की प्रक्रिया को अधिक आसान बनाना है।
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एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि यह बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराता है और छोटे कारोबारियों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ता है। सरकार लगातार इस क्षेत्र में सुधारों के माध्यम से उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।
विपक्ष ने हालांकि विधेयक पर चर्चा के दौरान कई मुद्दे उठाए और सरकार से अधिक जवाबदेही की मांग की। अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी नेताओं ने सदन में अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने विधेयक को पेश करते हुए कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को बदलते आर्थिक माहौल के अनुरूप मजबूत बनाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार छोटे और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
राज्यसभा में विधेयक पारित होने के बाद अब यह कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। सरकार को उम्मीद है कि इसके माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र को नई गति मिलेगी और छोटे कारोबारियों को अधिक अवसर प्राप्त होंगे।
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