करीब दो दशक बाद शिवसेना भवन लौटे राज ठाकरे के लिए यह इमारत कोई अनजानी जगह नहीं थी। यही वह स्थान है, जहां से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई थी। आज जब राज ठाकरे ने लगभग 20 वर्षों के बाद शिवसेना भवन की सीढ़ियां चढ़ीं, तो मंच पर उनके साथ उद्धव ठाकरे और संजय राउत भी मौजूद थे। ये वही नेता हैं, जिनके साथ जुड़ा दौर कभी राज ठाकरे के पार्टी छोड़ने के फैसले से जोड़ा जाता था।
संजय राउत ने इस अवसर पर कहा कि “अखंड हिंदू परिवार” इस साल की शुरुआत में एक साथ आया और पिछले सप्ताह राजनीतिक रूप से हाथ मिलाया। इस एकजुटता का स्पष्ट उद्देश्य आगामी बीएमसी चुनावों में महायुति को चुनौती देना है।
हालांकि राज और उद्धव ठाकरे चचेरे भाई हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक शैलियां एक-दूसरे से काफी अलग मानी जाती हैं। उद्धव ठाकरे को आमतौर पर धैर्यवान, सौम्य और शांत स्वभाव का नेता माना जाता है, जबकि राज ठाकरे अपनी आक्रामक शैली, तीखे तेवर और प्रभावशाली भाषणों के लिए पहचाने जाते हैं।
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आज की यह मुलाकात सिर्फ दो भाइयों के साथ आने की नहीं थी, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की दो अलग-अलग धाराओं के संगम का संकेत भी थी। दिलचस्प बात यह रही कि मंच पर वे नेता भी साथ दिखे, जो कभी सहयोगी थे और समय के साथ प्रतिद्वंद्वी बन गए थे।
राज ठाकरे ने शिवसेना भवन से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि इस इमारत से उनकी कई पुरानी और सुखद स्मृतियां जुड़ी हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ऐसा लगता है जैसे उन्हें 20 साल तक कैद में रखा गया हो, जिससे पत्रकारों से भरे हॉल में ठहाके गूंज उठे।
बीते कुछ समय से राज ठाकरे लगातार उद्धव ठाकरे के प्रति सम्मानजनक रुख अपनाते नजर आए हैं। जुलाई 2025 में लंबे समय बाद एक ही मंच पर आने पर भी उन्होंने पहले उद्धव ठाकरे को बोलने का आग्रह किया था। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उद्धव के बाएं बैठना नए राजनीतिक समीकरणों और पारिवारिक वरिष्ठता के संकेत देता है।
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