तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) के वरिष्ठ नेता अनिता आर. राधाकृष्णन को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी तब हुई, जब मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
यह मामला 20 जून को तूतीकोरिन (थूथुकुडी) जिले के आथूर में आयोजित डीएमके की एक जनसभा में दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, राधाकृष्णन ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक और विवादित टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
न्यायमूर्ति जी. के. इलंथिरैयन की एकल पीठ ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि तमिलनाडु में वर्ष 1967 से फिल्म जगत से जुड़े कई नेता शासन करते रहे हैं और सार्वजनिक मंचों पर दिए गए भाषणों की प्रकृति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
और पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्यूजीलैंड का पहला आधिकारिक दौरा अगले सप्ताह, एफटीए पर रहेगा फोकस
पुलिस के अनुसार, राधाकृष्णन अपने विधानसभा क्षेत्र तिरुचेंदूर के अंतर्गत आने वाले आथूर टाउन पंचायत में विकास कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण पूरा कर बाहर निकलते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचाया।
गिरफ्तारी के बाद डीएमके कार्यकर्ताओं ने आथूर में विरोध प्रदर्शन किया। समर्थकों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की तथा कुछ समय के लिए सड़क जाम कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
डीएमके सांसद कनिमोझी ने गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पुलिस का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए कर रही है और डीएमके ऐसे दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया तथा पुलिस जांच के आधार पर तय होगी। इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
और पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जुलाई के बाद कर सकते हैं उत्तराखंड का दौरा, कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे