भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की पहल आईसीएमआर-शाइन 2026 का दूसरा संस्करण मंगलवार से शुरू हो गया। ‘साइंस एंड हेल्थ इनोवेशन फॉर नेक्स्टजेन एक्सप्लोरर्स’ नामक इस दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली छात्रों को स्वास्थ्य अनुसंधान से सीधे जोड़ना है।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और आईसीएमआर की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम 11 और 12 अगस्त को देशभर के 83 स्थानों पर चल रहा है। इनमें आईसीएमआर संस्थान, मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाइयां और संबद्ध क्षेत्रीय इकाइयां शामिल हैं। कार्यक्रम के जरिए करीब 30,000 छात्रों को स्वास्थ्य अनुसंधान को करीब से समझने और वैज्ञानिकों से बातचीत करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश के केलांग से लेकर केरल और दीव से लेकर नागालैंड तक विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों तक वैज्ञानिक अनुसंधान की पहुंच बढ़ाना है।
और पढ़ें: ट्रंप बोले- फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को हटाना बहुत बड़ी गलती होगी
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने छात्रों से जिज्ञासु बने रहने और सवाल पूछने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हर खोज एक सवाल से शुरू होती है और हर नवाचार नई संभावनाओं को तलाशने की इच्छा से जन्म लेता है। उन्होंने छात्रों को विज्ञान को केवल विषय नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सुधार लाने वाले करियर के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।
कक्षा 9 से 12 तक के सरकारी और निजी स्कूलों के छात्र इसमें हिस्सा ले रहे हैं। उन्हें प्रयोगशालाओं का निर्देशित भ्रमण कराया जा रहा है। छात्र लाइव प्रदर्शन, अनुसंधान प्रदर्शनियों, पोस्टर वॉक और वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से वैज्ञानिक गतिविधियों को समझ रहे हैं।
कार्यक्रम में आईसीएमआर के वैज्ञानिक छात्रों के साथ अपने शोध अनुभव, विशेषज्ञता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्य साझा कर रहे हैं। इस दौरान आईसीएमआर के अनुसंधान और नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई।
कार्यक्रम के आधिकारिक शुभंकर ‘डॉ. क्यूरियो’ को भी शामिल किया गया है। आईसीएमआर ने छात्रों के लिए एक राष्ट्रव्यापी स्कूल प्रतियोगिता की घोषणा की है, जिसमें वे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी वास्तविक समस्याओं पर अपने शोध प्रश्न और समाधान सुझाएंगे।
और पढ़ें: कांगो में इबोला से मौतों का आंकड़ा 2,000 के पार, तेजी से फैल रहा संक्रमण