मेडिकल डिवाइस और स्वास्थ्य तकनीक उद्योग से जुड़े 11 प्रमुख संगठनों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित ड्राफ्ट बिल 2026 को लेकर चिंता जताई है। संगठनों ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा करने की मांग की है।
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) के नेतृत्व में लिखे गए संयुक्त पत्र में संगठनों ने कहा कि मेडिकल डिवाइस क्षेत्र की जरूरतें दवाइयों से अलग हैं। इसलिए इस क्षेत्र के लिए अलग और व्यापक कानून बनाए जाने की आवश्यकता है।
उद्योग संगठनों के मुताबिक मेडिकल उपकरणों की डिजाइन, तकनीक, निर्माण, गुणवत्ता, सुरक्षा और उपयोग से जुड़े मुद्दे दवा क्षेत्र से काफी अलग होते हैं। ऐसे में दोनों क्षेत्रों को एक ही नियामक ढांचे में रखने से उद्योग और मरीजों, दोनों के लिए व्यावहारिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
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संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्रालय से प्रस्तावित ड्राफ्ट बिल के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा करने और सभी संबंधित पक्षों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि नया कानून बनाते समय उद्योग, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों और मरीजों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मेडिकल तकनीक क्षेत्र भारत के स्वास्थ्य ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से लेकर जांच, निगरानी और उपचार में उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों तक, मेडिकल डिवाइस स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि एक स्पष्ट और अलग नियामक व्यवस्था से निवेश, नवाचार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही इससे मरीजों की सुरक्षा और उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
अब उद्योग संगठनों की नजर स्वास्थ्य मंत्रालय के अगले कदम पर है। यदि सरकार प्रस्तावित कानून में बदलाव करती है या मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के लिए अलग कानून की दिशा में आगे बढ़ती है, तो इसका देश के स्वास्थ्य तकनीक उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
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