अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित ‘धीमी घुसपैठ’ को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को केंद्र सरकार के सूत्रों ने खारिज कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने इन दावों को बिना ठोस प्रमाण के ध्यान आकर्षित करने की कोशिश बताया। रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में चीन की ऐसी कोई धीमी घुसपैठ नहीं हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्सों में अभी सीमांकन नहीं हुआ है। ऐसे क्षेत्रों में दोनों देशों के गश्ती दल कभी-कभी आमने-सामने आ सकते हैं। हालांकि, ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पहले से तय तंत्र और प्रोटोकॉल मौजूद हैं।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी सीमा पर निगरानी रखने और चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी विशेष घटना या प्रमाण के इस तरह के सनसनीखेज दावे करना केवल लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है।
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अरुणाचल प्रदेश पर चीन का पुराना दावा
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है और इसे ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है। सूत्रों के अनुसार, 1960 की भारत-चीन सीमा वार्ता के दौरान चीन ने अरुणाचल प्रदेश के करीब 69 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर दावा किया था।
1959 में चीन ने लोंगजू स्थित असम राइफल्स की चौकी पर हमला कर उस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से यह इलाका चीन की गतिविधियों और बुनियादी ढांचा निर्माण के कारण चर्चा में रहा है।
1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान कामेंग, सुबनसिरी, सियांग और लोहित घाटियों में चीनी सेना ने बड़े सैन्य अभियान चलाए थे। युद्धविराम के बाद चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा के उत्तर में लौट गई थी।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, संचार और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। इससे संवेदनशील इलाकों में गश्त और निगरानी क्षमता बढ़ी है।
भारत ने चीन के दावों को किया खारिज
विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। चीन द्वारा राज्य के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों पर भारत ने स्पष्ट किया है कि किसी दूसरे देश की ऐसी कार्रवाई वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकती।
भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के आधिकारिक नाम भी सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र पर दर्ज किए हैं। इनमें लोंगजू, थाग ला, जयरामपुर, जसवंतगढ़ और शेर-ए-थापा स्मारक जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।
चीन वर्ष 2017 से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के लिए चीनी नाम जारी करता रहा है। भारत ने इन नामों को काल्पनिक बताते हुए लगातार खारिज किया है और कहा है कि एकतरफा नाम बदलने से अरुणाचल प्रदेश पर भारत की संप्रभुता प्रभावित नहीं होती।
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