मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में छह महीने का एक बच्चा भी शामिल है, जिसके माता-पिता ने एक दशक तक बेटे के लिए दुआ की थी। सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल जाने से सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए और कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
सुनील साहू और उनकी पत्नी दस साल से बेटे की कामना कर रहे थे। छह महीने पहले उनका सपना पूरा हुआ, लेकिन बुधवार को उनका बेटा हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया। सुनील ने बताया, “उसे दस्त और बुखार हुआ था। डॉक्टर को दिखाया, दो दिन ठीक रहा। फिर अचानक रात में तेज बुखार आया, उल्टी हुई और घर पर ही उसकी मौत हो गई।”
दिसंबर के आसपास इलाके में लोगों को सामान्य बीमारी जैसा महसूस हुआ, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति भयावह हो गई। 31 वर्षीय उमा कोरी, जो पहले पूरी तरह स्वस्थ थीं, अचानक उल्टी-दस्त से बीमार पड़ीं। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
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74 वर्षीय मंजुला वाधे ने रात का खाना बनाया था। आधी रात के बाद उल्टी-दस्त शुरू हुए और सुबह अस्पताल ले जाते समय उनकी जान चली गई। उनके पति ने कहा कि इलाके में कई दिनों से पानी बदबूदार आ रहा था और इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है।
50 वर्षीय सीमा प्रजापत, 70 वर्षीय उर्मिला यादव और 75 वर्षीय नंदलाल की मौत भी इसी दूषित पानी से जुड़ी बताई गई है। कई परिवारों का कहना है कि पानी में नाले जैसी गंध आ रही थी, लेकिन खतरे का अंदाजा नहीं था।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते जलापूर्ति व्यवस्था की जांच और सुधार किया जाता तो इतनी जानें नहीं जातीं। मामले की जांच जारी है और प्रशासन ने पानी की सप्लाई पर नजर रखने का दावा किया है।
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