संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने संकेत दिया है कि ईरान के प्रमुख परमाणु संवर्धन ठिकानों पर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण शुरू हो सकता है। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रॉसी ने जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र के दौरे के दौरान कहा कि समझौते के अनुसार आईएईए को ईरान की परमाणु गतिविधियों और सुविधाओं की निगरानी का पूरा अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौता स्पष्ट रूप से एजेंसी को निरीक्षण की अनुमति देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि “निरीक्षण कब होगा यह समय का सवाल हो सकता है, लेकिन यह निश्चित रूप से होगा।” उनके अनुसार एजेंसी का मुख्य उद्देश्य ईरान के यूरेनियम भंडार और संवर्धन गतिविधियों की सटीक निगरानी करना है।
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यह निरीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2025 में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिन के संघर्ष के बाद कई संवर्धन केंद्रों तक अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों की पहुंच रोक दी गई थी। इसके चलते ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि पश्चिमी देश 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
दूसरी ओर ईरान ने अभी तक आईएईए प्रमुख के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि उन ठिकानों पर तत्काल निरीक्षण की कोई योजना नहीं है जो पिछले सैन्य हमलों में प्रभावित हुए थे।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस अंतरिम समझौते में ईरान को अपने यूरेनियम भंडार को कम करने और बदले में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में राहत देने की बात शामिल है।
स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच आगे तकनीकी स्तर की बातचीत की तैयारी चल रही है, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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