सबरीमाला मंदिर में सोने की कथित हानि से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने सोमवार को केरल हाईकोर्ट को बताया कि मंदिर से जुटाए गए कलाकृतियों के नमूने उन्नत वैज्ञानिक जांच के लिए मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) समेत देश की प्रमुख प्रयोगशालाओं को भेजे जाएंगे। यह जानकारी न्यायमूर्ति राजा विजयाराघवन और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ के समक्ष जांच की प्रगति की समीक्षा के दौरान दी गई।
SIT ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि द्वारपालक प्लेटों से सोने की कथित कमी के मामले में चार अतिरिक्त लोगों की भूमिका की जांच की गई है, जिनमें से दो की संलिप्तता की पुष्टि हुई है। वहीं, श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों के फ्रेम से सोने की कथित हानि के मामले में दो व्यक्तियों की भूमिका की जांच हुई, जिसमें एक व्यक्ति की संलिप्तता पाई गई।
SIT ने कहा कि यह पता लगाने के लिए उन्नत वैज्ञानिक परीक्षण बेहद जरूरी हैं कि धातु में कितना बदलाव हुआ, किस प्रकार की धातुकर्म प्रक्रिया अपनाई गई और मूल रूप से कितना सोना मौजूद था तथा बाद में कितना कम हुआ। इसके लिए एक्स-रे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (XRF), इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री (ICP-MS) और ऑप्टिकल एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी (OES) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
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अदालत ने कहा कि इन तकनीकों से मूल सोने की परत और वर्तमान परत की तुलना संभव होगी। सूक्ष्म अशुद्धियों और मिश्रधातु के विश्लेषण से यह तय किया जा सकेगा कि सोना हटाया गया, बदला गया या उसकी मात्रा कम की गई है। अदालत ने यह भी कहा कि विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में इस स्तर की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसलिए BARC मुंबई, नेशनल मेटलर्जिकल लैब जमशेदपुर और डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लैब हैदराबाद से मदद ली जाएगी।
कोर्ट ने माना कि मंदिर से जुड़े ऐसे गंभीर आरोपों का निष्कर्ष केवल गवाहों या दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए।
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