सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 11 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को बड़ा झटका देते हुए फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों के संचालन को लेकर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें खातों के पूर्ण संचालन की अनुमति नहीं दी गई थी।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने मामले के रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि हाई कोर्ट ने संतुलित आदेश पारित किया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी मुद्दे कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित मुख्य याचिकाओं में उठाए जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि मौजूदा अंतरिम आदेश पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज को पूरी तरह रोकने वाला नहीं है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने हाई कोर्ट के 20 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में टीएमसी के तीन एचडीएफसी बैंक खातों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने पार्टी को रोजमर्रा के खर्चों के लिए इन खातों से धन इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। साथ ही खर्च की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया था।
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प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत टीएमसी से जुड़े तीन बैंक खातों में मौजूद कुल 440.42 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं। जांच पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी के बाद शुरू हुई थी। इसमें कथित संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, अवैध रूप से धन जुटाने और संदिग्ध धन को टीएमसी के कुछ खातों के जरिए भेजने के आरोपों की जांच की जा रही है।
ईडी के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच केयरवेल एविएशन इंडिया और उससे जुड़ी एक कंपनी को धन हस्तांतरित किया गया। एजेंसी का दावा है कि इन लेनदेन का संबंध विमान और हेलीकॉप्टर की खरीद से था। 7 जुलाई को ईडी ने कुल छह बैंक खाते फ्रीज किए थे, जिनमें टीएमसी से जुड़े तीन खाते शामिल थे।
टीएमसी ने खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई को मनमाना और पर्याप्त आधार के बिना बताया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्य मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में ही जारी रहेगा।
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