वेनेजुएला पर अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी और मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। शनिवार (3 जनवरी, 2026) को अमेरिकी बलों द्वारा एक बड़े सैन्य अभियान में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद देश में सत्ता संकट गहरा गया। इसके बाद वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त करने का आदेश दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला का प्रशासन संभालेगा और उसके विशाल तेल भंडार का उपयोग करेगा। वहीं, मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन पर “नार्को-आतंकवाद” से जुड़े आरोपों में मुकदमा चलेगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक सत्ता हस्तांतरण की अपील की, जबकि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया। स्पेन, ब्राजील, मैक्सिको और चीन ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे “खतरनाक मिसाल” करार दिया। रूस और ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को सशस्त्र आक्रामकता बताया, वहीं दक्षिण अफ्रीका और मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने अमेरिका के कदम का समर्थन किया। यूरोपीय संघ, कनाडा, जापान और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने संयम, संवाद और लोकतांत्रिक समाधान की अपील की है।
कुल मिलाकर, वेनेजुएला संकट ने वैश्विक राजनीति में गहरी चिंता पैदा कर दी है और अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता तथा लोकतंत्र पर नई बहस छेड़ दी है।
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