पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद गरमाने वाला है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से सत्ता छीनने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इस चुनावी अभियान की कमान सीधे केंद्रीय गृह मंत्री और पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह संभाल रहे हैं। बूथ स्तर से लेकर केंद्रीय वॉर-रूम तक, बीजेपी का पूरा संगठन सक्रिय मोड में आ गया है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तीन सीटों से छलांग लगाकर 77 सीटें हासिल की थीं और मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस बार जमीनी स्तर पर मजबूत संगठनात्मक तैयारी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पैदा हुई हलचल और टीएमसी के भीतर बढ़ती दरारें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 साल लंबे शासन को खत्म करने में मदद करेंगी।
31 दिसंबर को अमित शाह ने दावा किया था कि बीजेपी आगामी चुनावों में दो-तिहाई बहुमत के साथ ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी। उन्होंने भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और घुसपैठ जैसे मुद्दों को लेकर टीएमसी पर तीखा हमला बोला। शाह ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार चुनावी फायदे के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा देकर राज्य की जनसांख्यिकी को “खतरनाक तरीके से बदल” रही है। उन्होंने वादा किया कि बीजेपी सत्ता में आने पर पश्चिम बंगाल से घुसपैठ पूरी तरह खत्म करने के लिए मजबूत “राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड” बनाएगी।
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बीजेपी सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने बीते पांच वर्षों में राज्य में व्यापक स्तर पर तैयारी की है और अब नई रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है। अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि चुनाव बांग्लादेशी घुसपैठ, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
इस बीच, टीएमसी के भीतर मतभेद और नए दलों के उभार से भी सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। हालांकि, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने दावा किया है कि उनकी पार्टी पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता में लौटेगी।
2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 216 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं और लेफ्ट-कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था।
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