असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को दावा किया कि अगली जनगणना में राज्य की कुल आबादी में “बांग्लादेशी मुसलमानों” की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि आने वाली जनगणना असम के लिए “और दुर्भाग्यपूर्ण आंकड़े” सामने ला सकती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि पिछले कई दशकों से असम में जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिल रहा है और बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों की आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है। एक सरकारी कार्यक्रम के इतर बातचीत में सरमा ने कहा, “जनगणना असम के लिए और भी चिंताजनक तथ्य सामने लाएगी। बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या राज्य की कुल आबादी के करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।”
उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई 2025 में भी उन्होंने यह दावा किया था कि यदि मौजूदा जनसंख्या वृद्धि दर जारी रही, तो वर्ष 2041 तक असम में मुसलमानों की आबादी हिंदुओं के लगभग बराबर हो सकती है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल आबादी 3.12 करोड़ थी, जिसमें 1.07 करोड़ मुसलमान (34.22 प्रतिशत) और 1.92 करोड़ हिंदू (61.47 प्रतिशत) थे।
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देशव्यापी जनगणना 2027 दो चरणों में कराई जाएगी। पहला चरण—हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना—अप्रैल से सितंबर 2026 तक होगा, जबकि दूसरा चरण—जनसंख्या गणना—फरवरी 2027 में होगा। यह प्रक्रिया मूल रूप से 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण टाल दी गई थी।
मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी कहा कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान सभी भाजपा विधायकों और बूथ-स्तरीय एजेंटों को “किसी भी संदिग्ध व्यक्ति” की पहचान कर शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी पार्टी को लगता है कि योग्य मतदाताओं के नाम छूटे हैं, तो वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं, न कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करके।
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