प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रमुख शिल्पकारों में से एक जीन ड्रेज़ ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार अपनी नई योजना VB G-Ram-G के माध्यम से रोजगार गारंटी योजना को “खत्म करना चाहती है।” उन्होंने मांग की कि जब तक सरकार नई योजना को वापस नहीं लेती, तब तक मनरेगा लागू है और इसके तहत जरूरतमंदों को रोजगार दिया जाना चाहिए।
बुधवार (7 जनवरी 2026) को उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर मनरेगा मजदूरों के धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जीन ड्रेज़ ने कहा कि सरकार मनरेगा के स्थान पर VB G-Ram-G नामक नई योजना लेकर आई है, जो काम चाहने वाले लोगों के लिए रोजगार गारंटी को कमजोर कर देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अंततः सरकार उस मनरेगा योजना को समाप्त कर देगी, जिसके लिए लंबे समय तक संघर्ष किया गया था और जो वर्ष 2005 में लागू हुई थी।
जीन ड्रेज़ ने कहा, “सरकार को यह समझना चाहिए कि जब तक नई योजना लागू नहीं होती, तब तक मनरेगा पूरी तरह से अस्तित्व में है और इसके तहत लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों और मजदूरों का कानूनी अधिकार है, जिसे किसी वैकल्पिक योजना के नाम पर कमजोर नहीं किया जा सकता।
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मनरेगा को “बचाने” के उद्देश्य से मजदूरों का यह धरना पिछले छह दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारी मजदूरों का कहना है कि नई योजना से न केवल रोजगार के अवसर घटेंगे, बल्कि मजदूरों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा भी प्रभावित होगी। उनका आरोप है कि सरकार धीरे-धीरे मनरेगा के बजट और कार्यान्वयन को कमजोर कर रही है।
जीन ड्रेज़ ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह मनरेगा को कमजोर करने के बजाय इसे और सशक्त बनाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और गरीबी से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
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