प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को स्वदेशी रूप से निर्मित प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ की कमीशनिंग की सराहना करते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत के विज़न को मजबूती देता है और देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि यह पोत न केवल भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को दर्शाता है, बल्कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ का भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) के बेड़े में शामिल होना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पोत समुद्री प्रदूषण से निपटने, पर्यावरण की रक्षा करने और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्वदेशी परियोजनाएं न केवल देश की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाती हैं, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में भी स्थापित करती हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय तटरक्षक जहाज ‘समुद्र प्रताप’ को औपचारिक रूप से कमीशन किया। यह भारतीय तटरक्षक बल के लिए स्वदेशी रूप से निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है। इसके साथ ही यह अब तक का तटरक्षक बल का सबसे बड़ा जहाज भी है। इस जहाज का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत किया गया है।
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‘समुद्र प्रताप’ को विशेष रूप से समुद्री तेल रिसाव, रासायनिक प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय आपदाओं से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अत्याधुनिक उपकरण और प्रणालियां समुद्र में आपात स्थितियों के दौरान त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। यह जहाज भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
सरकार का मानना है कि इस तरह के स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म देश की रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
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