अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भविष्य में रूस या चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने से रोकने के लिए अमेरिका को इस द्वीप का मालिकाना हक हासिल करना जरूरी है। शुक्रवार (9 जनवरी, 2026) को व्हाइट हाउस में तेल कंपनियों के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने यह बयान दिया।
ट्रंप ने कहा, “हम ग्रीनलैंड पर कुछ न कुछ जरूर करेंगे, चाहे वे चाहें या न चाहें। अगर हमने ऐसा नहीं किया तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे इसलिए हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 1951 के समझौते के तहत ग्रीनलैंड में पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य उपस्थिति उसके बचाव के लिए पर्याप्त नहीं है। ट्रंप के अनुसार, केवल समझौतों या लीज के आधार पर सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। ग्रीनलैंड करीब 57 हजार आबादी वाला द्वीप है और यह डेनमार्क के साम्राज्य का एक स्वायत्त क्षेत्र है।
और पढ़ें: ईरान में हिंसक प्रदर्शन तेज, मौतों का आंकड़ा 62 पहुंचा; UN में अमेरिका पर भड़काने का आरोप
ट्रंप ने कहा, “आप मालिकाना हक की रक्षा करते हैं, किराये या समझौतों की नहीं। हमें ग्रीनलैंड की रक्षा करनी होगी।”
राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस के अधिकारी ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें अमेरिकी सेना के संभावित उपयोग और ग्रीनलैंड के निवासियों को एकमुश्त भुगतान कर उन्हें डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका में शामिल होने के लिए राजी करने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं।
हाल के दिनों में ट्रंप और व्हाइट हाउस के अन्य अधिकारियों की टिप्पणियों पर कोपेनहेगन और यूरोप के कई देशों ने नाराजगी जताई है। अमेरिका और डेनमार्क नाटो के सहयोगी देश हैं और एक-दूसरे की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मंगलवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड से जुड़े फैसले लेने का अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क को है।
और पढ़ें: ग्रीनलैंड खरीद पर सक्रिय चर्चा, नाटो के प्रति प्रतिबद्ध हैं ट्रंप: व्हाइट हाउस