अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अपदस्थ वेनेजुएला राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सोमवार (5 जनवरी 2026) को न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की औपचारिक जानकारी दी जानी है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने वेनेजुएला में बढ़ती अस्थिरता और मादुरो को पकड़ने के लिए किए गए अमेरिकी सैन्य अभियान की वैधता को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
रविवार (4 जनवरी 2026) को वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने एक आयोग गठित किया, जिसका उद्देश्य अपदस्थ राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की रिहाई के प्रयास करना है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद रोड्रिगेज ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक की। अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में उनकी नियुक्ति के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अमेरिका के साथ सहयोग नहीं किया, तो उन्हें “मादुरो से भी बड़ी कीमत” चुकानी पड़ सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मादुरो को हिरासत में लेने के बाद वेनेजुएला पर अमेरिका का नियंत्रण है, हालांकि वाशिंगटन को कराकास में बनी नई अंतरिम सरकार के साथ भी संवाद करना पड़ रहा है। उधर, अमेरिकी कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों पर भी असर दिखा। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
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वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज ने कहा कि अमेरिकी हमले में मादुरो की सुरक्षा टीम का “एक बड़ा हिस्सा”, साथ ही कुछ सैन्यकर्मी और नागरिक, “निर्दयता से मारे गए।” हालांकि, अब तक किसी आधिकारिक मृतक संख्या की घोषणा नहीं की गई है।
इस घटनाक्रम ने लैटिन अमेरिका के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की है।
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