कांग्रेस ने शुक्रवार (9 जनवरी, 2026) को केंद्रीय गृह मंत्रालय पर गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के लिए टेब्लो (झांकियों) की खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। विपक्षी दल का कहना है कि मानक निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को दरकिनार कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को जानबूझकर लाभ पहुंचाया गया। कांग्रेस ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और गुजरात से सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि गृह मंत्रालय ने ‘एकता परेड’ के लिए टेब्लो केवल पांच चयनित कंपनियों से ही लेने का निर्णय किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन पांच कंपनियों का चयन किस आधार पर किया गया। गोहिल ने कहा, “न तो कोई टेंडर जारी किया गया, न ही किसी प्रकार की बोली आमंत्रित की गई। सीधे पांच नाम तय कर दिए गए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय ने समय की कमी का हवाला देकर इस प्रक्रिया को उचित ठहराने की कोशिश की, जबकि वास्तविकता यह है कि नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। कांग्रेस का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे सरकारी खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
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इसके साथ ही कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के भाई पंकज मोदी को सेवा नियमों का उल्लंघन करते हुए “आउट ऑफ टर्न” प्रमोशन और पुनर्नियुक्ति दी गई। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल टेब्लो खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और हितों के टकराव का भी संकेत देता है।
कांग्रेस ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सरकारी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर निर्णय क्यों लिए गए। पार्टी ने कहा कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
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