ओडिशा में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत सैकड़ों डॉक्टरों ने केंद्रीय वेतनमान की मांग को लेकर सोमवार (5 जनवरी 2026) को दो घंटे के लिए बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं का बहिष्कार किया। यह बहिष्कार सुबह 9 बजे से 11 बजे तक किया गया, जिसके कारण राज्य के कई जिलों में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में जिला मुख्यालयों के 32 अस्पतालों, लगभग 300 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) सहित कुल 6,000 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन विसंगतियों और अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ओएमएसए ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों के चार्टर पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। संगठन का कहना है कि डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के समान वेतन संरचना लागू करना, सेवा शर्तों में सुधार और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं शामिल हैं।
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डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मरीजों को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन अपनी जायज मांगों को लेकर उन्हें विरोध का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एसोसिएशन ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाएं इस दौरान चालू रखी गईं, ताकि गंभीर रोगियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डॉक्टरों और सरकार के बीच जल्द संवाद नहीं हुआ, तो इसका असर राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल, सरकार की ओर से इस हड़ताल पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अधिकारियों के स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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