अयोध्या के प्रसिद्ध श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और आभूषणों में कथित हेराफेरी और चोरी के मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा तेज कर दी गई है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने मंदिर की दान व्यवस्था, नकदी की गिनती और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह आरोप सामने आए हैं कि कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे और इसी दौरान नकदी तथा आभूषणों में कथित हेराफेरी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई कर्मचारी और प्रबंधन तथा काउंटिंग से जुड़े लोग जांच के दायरे में आ गए हैं।
इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे और रामलला के दर्शन किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि एसआईटी निष्पक्ष जांच कर रही है और चाहे कोई भी कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगले 15 दिनों में पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।
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जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीसीटीवी फुटेज की है, क्योंकि मंदिर परिसर और चढ़ावा काउंटिंग सेंटर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहती है, जिसके बाद वह स्वतः डिलीट हो जाती है। हालांकि जो फुटेज उपलब्ध हुई है, उसमें कुछ कर्मचारियों को कथित रूप से चढ़ावे की रकम छिपाते हुए देखा गया है। इन कर्मचारियों की पहचान कर ली गई है और उनसे पूछताछ जारी है, हालांकि अभी उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही।
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