मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार (5 जनवरी 2026) को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद एक “स्वच्छ” और सटीक मतदाता सूची पर टिकी होती है।
झारखंड के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता सूची के अद्यतन और शुद्धिकरण की प्रक्रिया में लगे अधिकारियों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) को इस पूरी प्रक्रिया की “नींव” बताया और कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले बीएलओ ही यह सुनिश्चित करते हैं कि मतदाता सूची सही, पारदर्शी और अद्यतन बनी रहे।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान उन सभी नागरिकों को सूची में शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो किसी कारणवश अब तक पंजीकृत नहीं हो पाए हैं। इसके साथ ही, मृत, स्थानांतरित या दोहराए गए नामों को हटाकर सूची को अधिक विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकता है जब हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिले और वह बिना किसी बाधा के इस अधिकार का प्रयोग कर सके। मुख्य चुनाव आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को पूरा करें।
सीईसी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग का लक्ष्य सिर्फ सूची तैयार करना नहीं है, बल्कि जनता में जागरूकता बढ़ाना और नागरिकों को अपने मताधिकार के महत्व को समझाना भी है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे मतदाता सूची की जांच करें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो समय रहते सुधार कराएं।
चुनाव आयोग के इस प्रयास को आगामी चुनावों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि एक सटीक और भरोसेमंद मतदाता सूची ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की गारंटी होती है।
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